सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए एक असत्यापित वीडियो का स्क्रीन शॉट जिसमें एक हिंदू भीड़ ख़ानाबदोश चरवाहा परिवार पर क्रूरता से हमला करते दिखाई देती है. इन पर गायों को वध करने के लिए ले जाने का आरोप है. 21 अप्रैल, 2017, जम्मू, भारत.

© 2017 Anonymous

(न्यू यॉर्क, 28 अप्रैल, 2017) भारत सरकार को गायों की खरीद-बिक्री या बीफ के लिए गाय मारने की अफवाहों पर मुस्लिम और दलितों पर जानलेवा हमले करने वाले स्वयं-भू "गौ रक्षकों" के बारे में मुस्तैदी से जांच करनी चाहिए और उन पर मुकदमा चलाना चाहिए, ये मांग आज ह्यूमन राइट्स वाच ने की. पुलिस ने निगरानी समूह के सदस्यों, जिनमें कई भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) से सम्बद्ध अतिवादी हिंदू समूहों से जुड़े हैं, के खिलाफ तुरंत कानूनी कार्रवाई करने के बजाय अक्सर गौ हत्या निषेध कानूनों के तहत हमले के शिकार लोगों, उनके रिश्तेदारों और सहकर्मियों के खिलाफ शिकायत दर्ज की है.

ज्यादातर हिन्दू गाय को पवित्र पशु मानते हैं और हिन्दू बहुसंख्यक भारत के अधिकांश हिस्सों में गौ-हत्या निषिद्ध है. मई 2015 से, बीफ़ के खिलाफ निगरानी समूहों के उग्र अभियान के कारण हिंसक भीड़ ने सात अलग-अलग घटनाओं में एक 12 वर्षीय लड़के सहित कम-से-कम 10 मुस्लिमों की हत्या की है. जुलाई 2016 में, गुजरात में निगरानी समूह के सदस्यों ने गौ-हत्या के संदेह में चार दलितों को नंगा किया, उन्हें एक कार से  बाँधा और लाठी और बेल्ट से पिटाई की. कई मामलों में, हमलावरों ने पीड़ितों से नकदी और सेलफोन भी लूट लिया है और उनकी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया है.

ह्यूमन राइट्स वॉच की दक्षिण एशिया निदेशक मीनाक्षी गांगुली ने कहा कि "गैरजिम्मेदार/सस्ती लोकप्रियता से प्रेरित स्वयंभू 'गौ रक्षक' लोगों को मार रहे हैं और अल्पसंख्यक समुदायों को आतंकित कर रहे हैं. सरकार को इस हिंसा की निंदा करनी चाहिए और इन हमलों के लिए ज़िम्मेदार या इनमें सहअपराधिता के आरोपों का सामना कर रहे लोगों पर तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए."

हाल ही में,  21 अप्रैल, 2017 को जम्मू और कश्मीर राज्य के जम्मू क्षेत्र में भीड़ ने पांच लोगों के खानाबदोश  चरवाहा परिवार जिसमें 9 साल की एक लड़की भी थी, पर इस संदेह में जानलेवा हमला किया कि वे अपनी  गायों को वध के लिए ले जा रहे हैं. सोशल मीडिया पर एक वीडियो में आम तौर पर भाजपा समर्थकों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले नारा बुलंद करता लोगों का एक समूह दिखाई देता है. इसमें यह समूह  उस परिवार की झोपड़ी तोड़ते, महिलाओं द्वारा रहम की भीख मांगे जाने के बावजूद बूढ़ों को छड़ और लाठी से पिटाई करते और आखिरकार घरों में आग लगाते हुए दिखाई देता है. वीडियो में भीड़ द्वारा हमला करते समय कई पुलिसकर्मियों को देखा जा सकता है, लेकिन संख्या में भीड़ उनपर भारी पड़ती दिखाई देती है  और जब भीड़ उन्हें वापस धकेलती रहती है तो वे पीछे हट जाते हैं. पुलिस ने 11 हमलावरों को गिरफ्तार किया है.

22 अप्रैल को नई दिल्ली में, पीपुल फॉर एनिमल्स, जिसका नेतृत्व भाजपा के एक अधिकारी करते हैं, से कथित तौर पर जुड़े पशु अधिकार कार्यकर्ताओं ने ट्रक में भैंस ढोने के कारण तीन लोगों की पिटाई की. प्रारंभ में, पुलिस इस हमले के लिए किसी को गिरफ्तार करने या पीपुल फॉर एनिमल्स जिसने हमले में शामिल होने से इनकार किया है, की भूमिका की जांच करने में नाकाम रही. इसके बजाय, जब घायल पीड़ितों को अस्पताल ले जाया गया तो पुलिस ने उन्हें पशु क्रूरता निवारण कानून के तहत गिरफ्तार कर लिया. लोगों को एक दिन बाद जमानत पर रिहा किया गया. घटना के दो दिन बाद, पुलिस ने दिल्ली के एक निवासी को गिरफ्तार किया, जिसने पीपुल फॉर एनिमल्स के सदस्य होने का दावा किया था. पुलिस को पीपुल फॉर एनिमल्स के ही एक अन्य सदस्य ने घटना के बारे में बताया था जो कथित रूप से उस "छापे दल" का हिस्सा था जो नियमित रूप से वाहनों को रोक कर यह जांच करते हैं कि उनमें मवेशी हैं या नहीं. पीपुल फॉर एनिमल्स, जिसकी शुरुआत एक पशु अधिकार समूह के रूप में हुई थी, ने बताया कि 2014 के बाद अतिसतर्कता(विजिलेंटिज्म) और उनके सदस्यों के खिलाफ जबरन वसूली के आरोपों के कारण इसने दिल्ली सहित कुछ अन्य शहरों की अपनी इकाइयों को बंद कर दिया है.

गुजरात के मुख्यमंत्री रहते और 2014 के राष्ट्रीय चुनाव अभियान के दौरान प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने बार-बार गायों के संरक्षण की बात कही थी. पिछली सरकार की "गुलाबी क्रांति" की चर्चा कर मोदी ने दावा किया था कि मांस निर्यात के कारण गाय और दूसरे मवेशी लुप्तप्राय बना दिए गए हैं. भाजपा नेताओं ने बहुसंख्यक हिंदू आबादी को पीड़ित बताने की कोशिशें की हैं.  इसके लिए वे ऐसे मुसलमान पुरुषों का डर दिखाते हैं, जो उनके मुताबिक भारत को मुस्लिम बहुसंख्यक देश बनाने के साजिश के तहत हिंदू महिलाओं का अपहरण और बलात्कार करते हैं या झांसा देकर उनके साथ रिश्ता बनाते हैं. वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश चुनावों तक, भाजपा के सांसद और वर्तमान में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री, योगी आदित्यनाथ ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जहाँ राज्य में मुस्लिमों की सबसे बड़ी आबादी रहती है, हिंदू पलायन की आशंका जताई थी. मई 2014 में भाजपा के सत्ता में आने के बाद से मोदी और उनकी पार्टी का समर्थन कर रहे अतिवादी हिंदू समूहों ने "राष्ट्रवाद" लागू करने के लिए देश भर में भीड़ के हिंसक हमलों का नेतृत्व किया है. वरिष्ठ भाजपा नेताओं, जिनमें निर्वाचित पदाधिकारी और हिंदू अधिकारों की पैरवी का दावा करने वाले विभिन्न समूहों के नेता शामिल हैं, ने नफरत की बुनियाद पर अपराधों को उकसाया है. यह दावा करते हुए स्वयं-भू  गौ-रक्षक तेजी से छापे मार  रहे हैं और हमले कर रहे हैं कि पुलिस गौ-हत्या करने वालों के खिलाफ पर्याप्त कार्रवाई नहीं करती है. कई ऐसी घटनाएं हुई हैं जिनमें उन्होंने कथित तौर पर मुसलमानों और दलितों पर  हमला किया, उन्हें उत्पीडित किया,  धमकी दी और उनसे पैसे वसूले. तथाकथित "अछूत" दलित  भी समान रूप से असुरक्षित हैं क्योंकि वे पारंपरिक रूप से मवेशियों के कंकालों को निपटाने का काम करते हैं और व्यवसायिक उद्देश्य से उन पर से चमड़ी उतारते हैं.

वर्ष 2012 में पंजीकृत 'भारतीय गौ रक्षा दल' मौजूदा गाय संरक्षण नेटवर्क में सबसे बड़ा नेटवर्क है. यह   एक छतरी संगठन है. इसके नेता, पवन पंडित ने ह्यूमन राइट्स वॉच को बताया कि नेटवर्क से देश भर के लगभग 50 समूह जुड़े हुए हैं और उनके दस हज़ार स्वयंसेवक लगभग सभी राज्यों में फैले हुए हैं.पंडित ने कहा कि "अब पूरा भारत एक गौ रक्षक समूह है क्योंकि लोग जानवरों के साथ ऐसी क्रूरता से नाराज हैं". पंडित ने यह भी कहा कि भाजपा सरकार भी गौ रक्षा पर पूरी मजबूती नहीं दिखा रही है. उन्होंने अपने सदस्यों द्वारा हिंसा किये जाने के आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि यह उन स्थानीय निवासियों की स्वाभाविक प्रतिक्रिया है जो गायों के साथ अत्याचार और उनके वध से नाराज हैं.

ह्यूमन राइट्स वॉच की मीनाक्षी गांगुली ने कहा कि "गाय के सवाल पर मुसलमानों और दलितों के क़त्ल पर भाजपा नेताओं की दबे जुबान में भर्त्सना यह संदेश देती है कि भाजपा इस हिंसा का समर्थन करती है.  ऐसी सरकार जो सार्विक विकास के वादे पर सत्ता में आई, सबसे असुरक्षित लोगों की रक्षा करने के लिए भी तैयार नहीं दीखती है".

 

'गाय संरक्षण' के ताज़ा मामले और चिंताएं

सरकार की चुप्पी और  इंकार

1 अप्रैल, 2017 को उत्तर-पश्चिम राज्य राजस्थान में भीड़ ने 55 वर्षीय दुग्ध उत्पादक (डेयरी) किसान पहलू खान और चार अन्य पर डंडे और बेल्ट के साथ बेरहमी से हमला किया. दो दिन बाद चोटों के कारण खान की मौत हो गई. छह अभियुक्तों में से तीन को गिरफ्तार कर लिया गया है. राज्य की भाजपा सरकार ने हत्या की निंदा नहीं की और राजस्थान सरकार के संसदीय मामलों के मंत्री ने तो हमले से ही इनकार कर दिया. राजस्थान के गृह मंत्री ने पीड़ितों पर दोष लगाकर तथाकथित गौ रक्षकों का बचाव करने की कोशिश की. उनका बयान देखिए, "लोग जानते हैं कि गाय का ग़ैरकानूनी व्यापार अवैध है, लेकिन वे ऐसा करते हैं. गौ भक्त उन्हें रोकने की कोशिश करते हैं. इसमें कुछ भी गलत नहीं है, लेकिन कानून अपने हाथों में लेना अपराध है."

हमलावरों के खिलाफ शिकायत दर्ज करने के बजाय, पुलिस ने पहले राजस्थान गौवंशीय पशु (वध और अस्थायी प्रवासन या निर्यात के नियमन के निषेध) अधिनियम, 1995 के तहत खान और अन्य पीड़ितों के खिलाफ मवेशियों के निर्यात और उनके साथ क्रूरता बरतने के लिए शिकायत दर्ज की. इसके तहत अधिकतम पांच साल जेल की सजा हो सकती है. पुलिस अज्ञात भीड़ के खिलाफ शिकायत दर्ज करने के पहले दो घंटे तक इंतजार करती रही. खान के बेटे ने आरोप लगाया कि पुलिस ने परिवार के खिलाफ मामला दायर किया है, हालांकि उनके पास राजस्थान में वैध तरीके से पशु खरीदने की रसीद थी. हमलों में घायल हुए एक के भाई मोहम्मद यूसुफ ने ह्यूमन राइट्स वॉच को बताया कि हमलावरों ने उनके भाई के पैंतीस हज़ार रुपये, सेलफोन और 75 हज़ार रुपये कीमत की तीन गायें चोरी कर लिए. वे अब डेयरी का कारोबार नहीं करना चाहते हैं. उन्होंने कहा, "हमने तय किया है कि हम अब मवेशियों का कोई कारोबार नहीं करेंगे. अगर हम दुधारु गाय नहीं रख सकते हैं, अगर अब हमें दूध पीने की अनुमति की आवश्यकता है, तो हम गाय क्यों रखें ?"

23 अप्रैल को कई पूर्व लोक सेवा अधिकारियों ने राज्य की मुख्यमंत्री से यह लिखित मांग की कि भीड़ में शामिल सभी आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार करें. आगे कहा कि तत्काल कार्रवाई करने में विफलता "सुशासन का मजाक होगा, जिससे अल्पसंख्यक अपने अधिकारों की रक्षा करने की सरकार की क्षमता में यकीन खो देंगे." दो दिन बाद, मुख्यमंत्री ने अंततः चुप्पी तोड़ी और कहा, "ऐसी गतिविधियां राजस्थान में बर्दाश्त नहीं की जाएंगी."

 

राज्यों द्वारा गौ रक्षा को बढ़ावा

जहाँ भाजपा नेता मुसलमानों और अन्य अल्पसंख्यकों पर हमलों की निंदा करने में असफल रहे, वहीँ उन्होंने गौ कल्याण के लिए नई नीतियां घोषित की हैं और गौ रक्षा की जरुरत पर तीखे बयान दिए हैं. उनकी नीतियों और बयानों ने भाजपा शासित राज्यों- राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, झारखंड, गुजरात, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में गौ रक्षक समूहों द्वारा उत्पीड़न को बढ़ावा दिया है.

मार्च 2017 में, गुजरात सरकार ने गौ हत्या के लिए उम्र कैद की सजा का प्रावधान किया. छत्तीसगढ़ में, भाजपा के मुख्यमंत्री ने कहा कि "हम गौ हत्या करने वालों को फांसी देंगे." 2016 में, हरियाणा सरकार ने कुछ गौ रक्षक समूहों को लाइसेंस देने का फैसला किया था ताकि वे कथित गौ तस्करी पर रोक लगाने में पुलिस की मदद कर सकें. इन समूहों के सदस्यों को अक्सर सड़कों, विशेषकर राजमार्गों पर रात में गश्त लगाते  देखा जाता है. वे वाहनों को रोकते हैं, उनमें मवेशियों की जाँच करते हैं, चालकों को धमकाते हैं और यदि उन्हें गायें मिलती है तो मार-पीट करते हैं. निगरानी समूहों के ये सदस्य वैध पशु ट्रांसपोर्टरों पर भी हमला करते हैं, भले ही वे भैंस जैसे अन्य जानवरों को ले जा रहे हों.

मीडिया में गौ रक्षकों द्वारा मध्य प्रदेश में रेलगाड़ियों और रेलवे स्टेशनों पर मुस्लिम पुरुषों और महिलाओं पर कथित रूप से हमला करने, गुजरात में दलितों को नंगा कर पीटने, हरियाणा में दो पुरुषों को जबरन गोबर खिलाने और गौ मूत्र पिलाने, जयपुर में मुस्लिम होटल में छापा मारने, हरियाणा में मुस्लिमों के त्यौहार ईद से पहले बीफ़ के लिए सड़क किनारे लगने वाले खाने की दुकानों और रेस्तरां की जांच में पुलिस को सहयोग करने की खबरें हैं. साथ ही, मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हरियाणा में अपने घर पर बीफ खाने के संदेह पर लोगों का कथित रूप से सामूहिक बलात्कार किया गया और हत्या की गई.

गौ हत्या और तस्करी की सूचना देने के लिए हरियाणा सरकार ने नागरिकों के लिए 24 घंटे की हेल्पलाइन शुरू की है और शिकायतों पर कार्रवाई के लिए पुलिस कार्यबल भी नियुक्त किया है. वर्ष 2013 से ही  राजस्थान में गायों के कल्याण को सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष विभाग का गठन किया हुआ है. अप्रैल 2017 में, राज्य सरकार ने "गाय और गौवंश के संरक्षण और वंश-वृद्धि" के लिए अतिरिक्त कर लगाया है.

मार्च में बीजेपी द्वारा हिन्दू महंथ आदित्यनाथ को भारत के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री नियुक्त किये जाने के बाद उन्होंने बूचडखानों और मांस की दुकानों को बंद करवा दिया, इनमें ज्यादातर मुस्लिमों द्वारा चलाए जाते थे. उन्होंने तर्क दिया कि वह अवैध प्रतिष्ठानों को बंद कर रहे हैं, लेकिन व्यवसायियों ने बताया कि उन्हें नोटिस या उचित प्रक्रिया के बिना प्रतिष्ठान बंद करने के लिए मजबूर किया गया. गौ-रक्षकों और 2002 में आदित्यनाथ द्वारा स्थापित अतिवादी हिंदू समूह- हिंदू युवा वाहिनी के सदस्यों ने  ऐसे कुछ अभियानों में पुलिस की मदद की.

आदित्यनाथ सहित इस समूह के कई सदस्यों पर हिंसा भड़काने, हत्या के प्रयास, दंगे करने,घातक हथियार रखने और दो धार्मिक समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने जैसे आपराधिक आरोप हैं. खबरों के मुताबिक समूह ने मांस कारोबार बंद करने के लिए हिंसा, आतंक और धमकी का इस्तेमाल किया. लेकिन राज्य के उपमुख्यमंत्री और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने रॉयटर्स को बताया कि आदित्यनाथ के संगठन के सदस्य जिम्मेदार नागरिकों के रूप में काम कर रहे हैं और उन्होंने इन आरोपों को खारिज किया कि वे "समानांतर प्रशासन" चला रहे हैं.

अधिकारियों ने आम तौर पर गौ-रक्षा के नाम पर सड़कों पर घुमक्कड़ी करने और मुसलमान और दलितों से मार-पीट करने वाले युवाओं की अनदेखी की है और इसके बजाए इस तरह के कार्यों का शांतिपूर्ण विरोध करने वालों को निशाना बनाया है. सोशल मीडिया पर आदित्यनाथ की आलोचना करने के लिए कवि, फिल्म निर्माता और छात्र सहित कम-से-कम सात लोगों पर आपराधिक मुकदमा दर्ज किया गया. इन पर सामाजिक समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देने से लेकर समुदाय विशेष की धार्मिक भावनाओं को चोट पहुंचाने जैसे आरोप लगाये गए हैं.

22 अप्रैल को, भाजपा से जुड़े समूह बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद के सदस्यों ने उत्तर प्रदेश में दो पुलिस स्टेशनों पर हमला किया. वे अपने उन सहयोगियों की गिरफ्तारी का विरोध कर रहे थे जिन पर कथित तौर पर एक मुस्लिम से मार-पीट करने और लूटने का आरोप था. पुलिस ने कहा कि बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद के लोगों ने पुलिस स्टेशनों पर पत्थर फेंके, एक पुलिसकर्मी को मारा, उसकी मोटर साइकिल में आग लगा दी और सर्विस रिवाल्वर छीन ली. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने मीडिया को बताया कि हिंदू युवा वाहिनी के लोग भी पुलिस स्टेशनों पर हमला करने वाली भीड़ में शामिल थे.

 

गायों के नाम पर हुई हत्याओं पर अपर्याप्त कार्रवाई

1 अप्रैल को पहलू खान की हत्या से पहले, गोमांस के लिए गायों के व्यापार या हत्या के संदेह में हिंसक भीड़ ने कम-से-कम 9 अन्य लोगों पर जानलेवा हमला किया या  उन्हें मार डाला.

मई 2015, राजस्थान

30 मई 2015 को भीड़ ने नागौर जिले के बिरलोका गांव में मांस की दुकान चलाने वाले 60 वर्षीय अब्दुल गफ्फार कुरैशी की डंडे और लोहे की छड़ से बेरहमी से पिटाई की थी. अगले दिन उनकी मृत्यु हो गई. भीड़ ने उनके घर और दुकान को भी तोड़ डाला था. घटना के दो साल बाद, पुलिस ने हमले के तीन अभियुक्तों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया, जबकि छह को अभी भी गिरफ्तार  किया जाना बाकी है. यह मामला अदालत में लंबित है.

अगस्त 2015, उत्तर प्रदेश

2 अगस्त, 2015 को दादरी शहर के कैमराला गांव में मवेशी चोर होने के संदेह में भीड़ ने तीन लोगों- अनफ, आरिफ और नाज़िम को पीट-पीट कर मार डाला था. भीड़ ने उनके ट्रक पर दो भैंसे मिलने के बाद उसमें आग भी लगा दी थी. इस घटना के गवाह रहे एक किसान ने फ्रंटलाइन पत्रिका को बताया कि तीनों की मौत के बाद पुलिस पहुंची थी. उन्होंने कहा, "जब गाय मारी जाती है, तो भावनाएं भड़क जाती हैं और ऐसी चीजें हो सकती हैं."

पुलिस ने मृतकों के खिलाफ चोरी, जबरन घुसने और हत्या के प्रयास का मामला दायर किया, आरोप लगाया कि पहले उन्होंने गोलीबारी शुरू की थी. वहां के पुलिस अधीक्षक ने ह्यूमन राइट्स वॉच के इन सवालों के जवाब नहीं दिया कि क्या इन हत्याओं के लिए ग्रामीणों के खिलाफ कोई मामला दर्ज हुआ.

सितंबर 2015, उत्तर प्रदेश

28 सितंबर, 2015 को दादरी शहर के बिशारा गांव में भीड़ ने ईंटों से कुचलकर 50 वर्षीय मोहम्मद अख़लाक़ को मार डाला और उनके 22 वर्षीय पुत्र को गंभीर रूप से घायल कर दिया. हमला पास के हिंदू मंदिर से इस घोषणा के बाद हुआ कि अख़लाक़ ने एक बछड़ा मारा है. पुलिस ने छह लोगों को गिरफ्तार किया, लेकिन अख़लाक़ के घर से मांस भी जब्त कर लिया और गोमांस की जांच के लिए इसे फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया. ग्रामीणों ने गिरफ्तारी का विरोध किया- वाहनों को तोड़फोड़ किया, पुलिस वैन को क्षति पहुंचाई और एक मोटरसाइकिल में आग लगा दी.

 उस समय उत्तर प्रदेश की समाजवादी पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार ने अख़लाक़ के परिवार के लिए 10 लाख रुपये मुआवजे की घोषणा की और मुख्यमंत्री ने जिले के अधिकारियों और पुलिस को उनके परिवार को पूरी सुरक्षा मुहैया करने का आदेश दिया. हालांकि, एक वरिष्ठ भाजपा नेता और केंद्र सरकार में मंत्री ने अख़लाक की हत्या को एक "दुर्घटना" करार दिया था.

राज्य के भाजपा विधायक संगीत सोम अख़लाक़ की हत्या के बाद आरोपियों, जिनमें से एक स्थानीय भाजपा नेता का पुत्र है, के साथ एकजुटता दिखाने के लिए दादरी गए. वह पहले से ही सांप्रदायिक दंगों को उकसाने के आरोपों का सामना कर रहे हैं. सोम ने अख़लाक़ की हत्या की निंदा नहीं की बल्कि अख़लाक़ के परिवार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं करने के लिए राज्य सरकार की आलोचना की. पड़ोसी राज्य हरियाणा के भाजपाई मुख्यमंत्री ने अख़लाक़ की हत्या को "सामान्य गलतफहमी" बताया और कहा कि "मुसलमान इस देश में रह सकते हैं, लेकिन उन्हें बीफ खाना छोड़ना होगा."

दिसंबर 2015 में, उत्तर प्रदेश पुलिस ने 18 लोगों के खिलाफ आरोप दर्ज किया. इसके बाद कई सुनवाईं हो चुकी हैं, लेकिन इस मामले में बहुत कम प्रगति हुई है. इस बीच, अख़लाक़ का परिवार अपनी सुरक्षा  के कारण दिल्ली चला गया है.

 

अक्टूबर 2015, जम्मू और कश्मीर

9 अक्तूबर, 2015 को जम्मू और कश्मीर के उधमपुर जिले में दक्षिण पंथी हिंदू भीड़ ने एक ट्रक पर कथित रूप से गैसोलीन बम फेंके थे. यह ट्रक 18 वर्षीय जाहिद भट चला रहे थे और भीड़ को संदेह था वह बीफ की ढुलाई कर रहे थे. दस दिनों बाद चोट के कारण अस्पताल में उनकी मौत हो गई. उनके साथ सफ़र कर रहे दो अन्य भी घायल हुए थे. भट के ट्रक में कोयला मिला था.

जाहिद की मौत के बाद दक्षिण कश्मीर स्थित उनके गांव में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हिंसक झड़प हुई. पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता और राज्य के मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद ने हत्या की निंदा की और मुआवजे की घोषणा की, लेकिन परिवार ने इसे अस्वीकार कर दिया और न्याय की मांग की.

पांच लोगों को हत्या, दंगा, साजिश करने और विस्फोटकों के इस्तेमाल के लिए गिरफ्तार किया गया.

 

अक्टूबर 2015, हिमाचल प्रदेश

शिमला के पास एक गांव सराहन में हिंदू भीड़ ने 14 अक्टूबर, 2015 को उत्तर प्रदेश के निवासी नोमान को इस संदेह में कथित तौर पर पीट-पीट कर मार डाला कि वे गायों को तस्करी कर रहे हैं. भीड़ ने ट्रक पर सवार चार अन्य लोगों को भी पीटा. पुलिस ने उन चार लोगों को तुरंत गिरफ्तार कर गौ हत्या निषेध और पशु क्रूरता निवारण कानूनों के तहत मुकदमा दर्ज किया.

बाद में, पुलिस ने हत्या का भी मामला दर्ज किया और कहा कि वह इस बिंदु पर जांच करेगी कि हमले के पीछे हिंदू अतिवादी समूह बजरंग दल के सदस्य थे या नहीं.

मार्च 2016, झारखंड

झारखंड में 18 मार्च 2016 को 35 वर्षीय मुस्लिम मवेशी व्यापारी मोहम्मद मजलुम अंसारी और  12 वर्षीय लड़के मोहम्मद इम्तयाज़ खान के शव एक पेड़ से लटके हुए मिले थे. उनके हाथ पीठ पीछे बंधे थे और उनके शरीर पर चोटों के निशान थे. पुलिस ने आठ लोगों को गिरफ्तार किया, जिनमें कुछ स्थानीय गौ रक्षक समूह से जुड़े हैं. मामला अभी अदालत में लंबित है.

अंसारी के भाई, जो गांव में एक छोटी दुकान चलाते हैं, ने ह्यूमन राइट्स वॉच को बताया कि वह अब तक इस मामले पर दो लाख रुपए खर्च कर चुके हैं और उन्होंने इसे अंजाम तक पहुचाने का पक्का इरादा कर रखा है लेकिन उन्हें उम्मीद नहीं है. उन्होंने कहा, "मुझे नहीं लगता कि हमें न्याय मिलेगा. सरकार उनकी है. वे अमीर हैं, वे शक्तिशाली हैं, पुलिस भी उनकी ही है."