(न्यू यार्क) – मानवाधिकार संस्था ह्यूमन राइट वॉच ने कहा है कि चीन व हांगकांग की सरकारें, हांगकांग के निवासियों के मतदान के जरिए राजनैतिक चुनाव के अधिकार की शांतिपूर्वक हिमायत का आदर करें और समूह ऑक्यूपाई सेंट्रल के अहिंसात्मक कार्यक्रमों में हस्तक्षेप न करें।

लोकतंत्र हिमायती समूह ऑक्यूपाई सेंट्रलने 20 जून, 2014 से शहर भर में नागरिक जनमत संग्रह कराने की घोषणा की है जिसके दौरान अंतरर्राष्ट्रीय कानूनों के मुताबिक हांगकांग की जनता मतदान के जरिए राजनैतिक चुनाव संबंधी राजनैतिक सुधारों के तीन प्रस्ताव में से किसी एक का चयन कर सकती है। चीनी शासन के तहत लगभग काम करने वाले हांगकांग के संविधान के मूल कानून में मताधिकार के जरिए प्रगति की संभावना जतायी गयी है।

चीन की राज्य परिषद ने 10 जून को हांगकांग की स्थिति पर जारी एक श्वेत पत्र में कहा है कि यह समूचा क्षेत्र केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है और हांगकांग की स्वायत्ता की सीमा वहीं तक है जहां तक इसे केंद्र सरकार ने दे रखी है। श्वेत पत्र में कहा गया है कि हांगकांग के नेताओं और मुख्य कार्यकारी को देशभक्त व देश के प्रति वफादार होना जरुरी है। इस तरह के बयान 1997 में हांगकांग के ब्रिटिश शासन के चीन को हस्तांतरण के लिए किए गए अंतरर्राष्ट्रीय समझौते साइनो-ब्रिटिश संधि 1984 में वर्णित कानूनों और शर्तों का खुला उल्लंघन हैं। उक्त संधि में चीन के नियंत्रण में आने के बाद हांगकांग को रक्षा और विदेशी मामलों को छोड़ कर बड़े पैमाने पर स्वायत्ता की गारंटी दी गयी थी।

ह्यूमन राइट वॉच की चीन की निदेशक सोफिया रिचर्डसन ने कहा, “श्वेत पत्र से साफ संकेत मिलते हैं कि बीजिंग में भारी जनदवाब के बावजूद हांगकांग को राजनैतिक चुनाव के लिए मताधिकार की मांग पर विचार नही किया जाएगा।“ उन्होंने कहा, “चीन का ऐसा किया जाना न केवल साइनो ब्रिटिश संयुक्त घोषणापत्र के मूल कानूनों के खिलाफ है बल्कि इससे हांगकांग में तनाव बढ़ेगा जहां के लोग ने दशकों से अपने लोकतांत्रिक अधिकारों की बहाली का इंतजार किया”।

हाल के महीनों में हांगकांग के मत्रियों और बीजिंग के पूर्व अधिकारियों ने ऑक्यूपाई सेंट्रल के आंदोलनों की आलोचना तेज कर दी है।हांगकांग के सुरक्षा प्रमुख ली तुंग वोक ने एक समाचार पत्र में अंदेशा जताया है कि एक बार अतिवादियों के हाथ में आते ही ऑक्यूपाई सेंट्रल एक हिंसक समूह में बदल जाएगा। चीनी समाचार एजेंसी सिन्हुआ के पूर्व निदेशक जी नान ने कहा है कि हांगकांग में चीन विरोधी बाहरी व अंदरुनी ताकतें हांगकांग पर नियंत्रण के लिए ऑक्यूपाई सेंट्रल का उपयोग कर रही हैं। उन्होंने कहा कि चीन की जनमुक्ति सेना दंगों पर काबू करने और लोकतंत्र के बहाने से चीन के समाजवादी शासन को अस्थिर करने के लिए हांगकांग का इस्तमाल करने की दशा में सीधा हस्तक्षेप करने को तैयार है। हांगकांग के शिक्षा सचिव एडी नी हॉक किम ने ऑक्यूपाई सेंट्रल का साथ देने वाले छात्रों व शिक्षकों को चेतावनी दी है।

आयोजकों के मुताबिक जून 13, 2014 से ऑक्यूपाई सेंट्रल की जनमत संग्रह संबंधी वेबसाइट जहां इलेक्ट्रानिक वोटिंग की जा सकती है, अभूतपूर्व तरीके सो ठप पड़ी हैं और इसे खोलने पर डिस्टर्बड डीनायल ऑफ सर्विस का संदेश दिख रहा है।

जनमत संग्रह नागरिक समाज की ओर से उठाए जाने वाले कई कदमों का एक हिस्सा है। बीजिंग और हांगकांग की सरकारों के मतदान के जरिए राजनैतिक चुनाव के अंतरराष्ट्रीय मानों का पालन न करने चुनाव सुधार लागू करने में नाकाम रहने पर अब यह समूह हांगकांग के वित्तीय एव राजनैतिक जनपद में सविनय अवज्ञा का अहिसंक आंदोलन चलाएगा।

ऑक्यूपाई सेंट्रल ने अपने घोषणा पत्र में यह संकल्प लिया है कि वह शांतिपूर्ण गतिविधयां करेगा और उसके धरने में हिस्सा लेने वाले लोगों को अहिंसा के शपथपत्र पर हस्ताक्षर करना होगा। वर्ष 1997 में चीन के अधिकार क्षेत्र में शामिल होने के बाद से हांगकाग में शांतिपूर्ण ठंग से एकत्र होने, समूह बनने और अभिव्यक्ति के अधिकारों का आदर किया जाता रहा है। मगर हाल के दिनों में हांगकांग में गैरसरकारी संस्थाओं और कार्यकर्ताओं ने गिरफ्तारी और प्रदर्शनकारियों पर मुकदमा
चलाए जाने की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जाहिर करते हुए अहिंसक प्रदर्शनों में पुलिस की ओर से वीडियों रिकार्डिंग आदि की हरकतों के बारे में सचेत किया है।

हांगकांग में विरोध प्रदर्शन सार्वजनिक व्यवस्था अध्यादेश के दायरे में आते हैं जिसके तहत 30 से ज्यादा लोगों के प्रदर्शन में भाग लेने की दशा में पुलिस को सात दिन पहले सूचना देकर आयोजकों को प्राशासन से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना होता है। इंटरनेशनल कान्वेंशन ऑन सिविल एंड पॉलिटकल राइट्स (आईसीसीपीआर) के प्रावधानों को लागू कराने वाली संस्था संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार समिति ने कई बार यह चिंता जतायी है कि अध्यादेश एकत्र होने की स्वतंत्रता के अधिकार पर जरुरत से ज्यादा प्रतिबंध लगाता है।

ब्रिटिश अधिकार क्षेत्र रहने के दिनों से ही हांगकांग में आईसीसीपीआर के कानून मान्य हैं और शांतिपूर्ण ढंग से एकत्र होने का अधिकार हांगकांग अधिकार बिल में भी वर्णित है।

आईसीसीपीआर की धारा 27 में कहा गया है कि हांगकाग के निवासियों को शांतिपूर्ण ढंग से एकत्र होने की स्वतंत्रता होगी। आईसीसीपीआर की धारा 21 के मुताबिक इस अधिकार पर तब तक कोई प्रतिबंध नही लगाया जा सकता जब तक इससे राष्ट्र की सुरक्षा, नागरिक सुरक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य या लोगों के स्वतंत्रता के अधिकार को खतरा न हो।

कानून व्यवस्था सुनिश्चित कराने वाले अधिकारियों को संयुक्त राष्ट्र के बल व आग्नेय अस्त्रों के प्रयोग संबंधी मूल सिद्धांत साफ तौर पर बताते हैं कि जहां तक संभव हो अहिंसात्मक तरीकों का प्रयोग हो और बल प्रयोग तभी हो बाकी अन्य तरीके निष्प्रभावी हो जाएं। जहां बल प्रयोग अपरिहार्य हो जहां वहां भी इनका प्रयोग अपराध की गंभीरता के मद्देनजर ही किया जाए।

कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारियों को बल का न्यूनतम प्रयोग करना चाहिए और जहां तक हो सके इससे बचना चाहिए।

दिसंबर 4, 2013 से लेकर मई 3, 2013 के दौरान हांगकांग सरकार ने चुनाव सुधारों को लेकर एक परामर्शी दस्तावेज जारी किया। इस परामर्शी दस्तावेज में आईसीसीपीआर का जिक्र तक नहीं था। यह 2007 में संवैधानिक विकास पर ग्रीन पेपर के नाम से चुलाई 2007 में जारी परामर्शी दस्तावेज से एक अलग तरह की स्थिति थी।

ह्यूमन राइच वॉच ने हांगकांग और केंद्र सरकार से अनुरोध किया है कि 2017 में प्रस्तावित मुख्य कार्यपालिका चुनाव सुधार पर कोई भी फैसला अतंरर्राष्ट्रीय मानवाधिकार व आईसीसीपीआर के अपेक्षाओं के अनुरुप किया जाए। चुनावों में प्रत्याशियों का नामांकन करने वाली कोई भी समिति इन अपेक्षाओं के अनुरुप हो और उसका चुनाव मताधिकार के जरिए हो। ह्यूमन राइट वॉच हांगकांग और केंद्रीय सरकार से यह भी मांग करती है कि राजनैतिक चुनाव के लिए मताधिकार की व्यवस्था लाने के लिए एक विस्तृत व समयबद्ध कार्यक्रम तैयार किया जाए।

रिचर्डसन ने कहा कि अपनी कानूनी बाध्याताओं से मुंह मोडऩे और ऑक्यूपाई सेंट्रल की आलोचना करने के बजाए सक्षम अधिकारियों को राजनैतिक चुनाव के लिए मताधिकार देने के त्वरित व प्रभावी उपायों को लागू करने पर विचार करना चाहिए। अगर इन मागों को लेकर केंद्र में कोई अहिसंक शांतिपूर्ण धरना का आयोजन किया जाता है तो हांगकांग पुलिस को बिना बल प्रयोग के इससे निपटना चाहिए।