भारत के सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला दिया कि आपसी सहमति से बने समलैंगिक संबंध को अपराध करार देना असंवैधानिक है. दुनिया के दूसरी सबसे अधिक आबादी वाले देश में मानवाधिकारों और एलजीबीटी समूह की निजता और बराबरी के अधिकारों के लिए  यह एक बड़ी जीत है.