ह्यूमन राइट्स वॉच ने आज जारी एक रिपोर्ट में कहा है कि भारत में बलात्कार की उत्तरजीवी महिलाएं और लड़कियाँ न्याय और जरूरी सहायता सेवाएं प्राप्त करने में भारी अवरोधों का सामना कर रही हैं. दिसंबर 2012 में दिल्ली में छात्रा ज्योति सिंह पांडे के सामूहिक बलात्कार और हत्या के बाद कानूनी और अन्य सुधार तो किए गए, लेकिन अभी तक वे पूरी तरह ज़मीन पर नहीं उतर पाए हैं. 82- पृष्ठों की रिपोर्ट, "सब मुझे दोष देते हैं": भारत में यौन हमलों की उत्तरजीवियों के समक्ष न्याय और सहायता सेवाएँ पाने में बाधाएं, यह बताती है कि बलात्कार और अन्य यौन हिंसा की उत्तरजीवी महिलाओं और लड़कियों को प्रायः पुलिस थानों और अस्पतालों में अपमान का शिकार होना पड़ता है. अक्सर पुलिस उनकी शिकायतें दर्ज करने में आना-कानी करती है, पीड़ितों और गवाहों को मामूली संरक्षण मिलता है और चिकित्सा पेशेवर अभी भी अपमानजनक "टू-फिंगर टेस्ट"(दो अँगुलियों द्वारा परीक्षण) के लिए दबाव डालते हैं. न्याय और गरिमा के रास्ते की ये बाधाएं पीड़ितों को मिलने वाली अपर्याप्त स्वास्थ्य सेवा, परामर्श, और कानूनी सहायता से जुड़ी हुई हैं.