माले, मालदीव में एक प्रदर्शन के दौरान राजनीतिक कैदियों की रिहाई की मांग कर रहे प्रदर्शनकारी को हिरासत में लेती पुलिस, 2 फरवरी, 2018.

© 2018 मोहम्मद शारुहान/एपी फोटो

(न्यूयॉर्क) – ह्यूमन राइट्स वॉच ने आज जारी एक रिपोर्ट में कहा है कि मालदीव सरकार द्वारा राजनीतिक विपक्ष और मीडिया को धमकी से सितंबर 2018 में होने वाले चुनावों की स्वतंत्रता और निष्पक्षता संदिग्ध हो गई है. हिंद महासागर स्थित इस द्वीपसमूह की सरकार ने सत्ता पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए न्यायपालिका और राष्ट्रीय चुनाव आयोग में भी हस्तक्षेप किया है.

ह्यूमन राइट्स वॉच के एशिया निदेशक ब्रैड एडम्स ने कहा, “मालदीव सरकार ने कार्यकर्ताओं और पत्रकारों से लेकर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों तक असहमति की हर एक आवाज़ को दबाया है. सितंबर में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने की दिशा में राजनीतिक स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक शासन बहाल करने के लिए तत्काल कदम उठाना जरूरी है.”

‘एन ऑल-आउट असाल्ट ऑन डेमोक्रेसी’: क्रशिंग डिससेंट इन मालदीव्स” शीर्षक रिपोर्ट में यह बताया गया है कि राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन अब्दुल गयूम की सरकार ने असहमति को दबाने और आलोचकों को धमकाने, मनमाने ढंग से गिरफ्तार और कैद करने के लिए कैसे हुक्मनामों और व्यापक व अस्पष्ट कानूनों का इस्तेमाल किया है. इन कार्रवाइयों के दौरान विपक्षी कार्यकर्ताओं और राजनेताओं के खिलाफ आतंकवाद-निरोधी कानूनों का व्यापक रूप से इस्तेमाल किया गया; मीडिया और सोशल मीडिया कार्यकर्ताओं के खिलाफ मानहानि-विरोधी कानून को लागू किया गया और शांतिपूर्ण रैलियों और विरोध-प्रदर्शनों को रोकने के लिए सभा पर प्रतिबंध लगाया गया. धार्मिक चरमपंथियों और आपराधिक गिरोहों – जिनमें से कई को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है - ने बेख़ौफ़ होकर असहमति रखने वालों पर हमले किए हैं और कई मौकों पर उनका क़त्ल किया. इसने मालदीव के उदीयमान लोकतंत्र और संघर्षशील नागरिक समाज को पंगु बना दिया है.

ह्यूमन राइट्स वॉच ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र और प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय साझेदारों को राष्ट्रपति यमीन से मांग करनी चाहिए कि वह संगठन बनाने की स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण सभा करने और राजनीतिक भागीदारी की स्वतंत्रता सहित अन्य मौलिक मानवाधिकारों को खत्म करने वाली दमनकारी कार्रवाइयों पर लगाम लगाएँ.

23 सितंबर को होने वाले चुनावों से पूर्व मालदीव सरकार को विपक्ष, पत्रकारों, कार्यकर्ताओं और न्यायाधीशों के खिलाफ राजनीतिक उत्पीड़न को समाप्त करने के लिए तत्काल कदम उठाने चाहिए. ह्यूमन राइट्स वॉच ने कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए जरूरी है कि यह ऐसे वातावरण में आयोजित हो जिसमें मतदाताओं, उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों पर दवाब न हो, उनके साथ भेदभाव न बरता जाए और उन्हें धमकी न दी जाए.

फरवरी में, राष्ट्रपति यमीन ने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले को रद्द करने के लिए आपातकाल की घोषणा की, जिसमें नौ विपक्षी नेताओं की सज़ा को रद्द कर दिया गया था. उन नेताओं में पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद शामिल हैं, जिन्हें 2015 में एक मुकदमे में उचित प्रक्रिया मानकों का पालन किए बगैर 13 साल की सजा सुनाई गई थी. विरोधी दलों के पक्ष में आए फैसलों के बाद राजनीतिक रूप से प्रेरित आरोप लगाकर सुप्रीम कोर्ट के दो न्यायाधीशों को गिरफ्तार कर लिया गया. यमीन सरकार ने विपक्षी नेताओं को चुनाव लड़ने से रोकने के लिए चुनाव आयोग से भी आदेश जारी करवाए. सरकार ने आतंकवाद-निरोधी कानून के अस्पष्ट प्रावधानों के तहत विपक्षी नेताओं को जेल में बंद कर दिया, विरोध-प्रदर्शनों को प्रतिबंधित किया और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार कर लिया. अंतरराष्ट्रीय दबाव में, यमीन ने 22 मार्च को आपातकाल हटा लिया.

ह्यूमन राइट्स वॉच ने कहा है कि मालदीव सरकार को सरकार की आलोचना के लिए व्यक्ति विशेष के खिलाफ आपराधिक जांच और आतंकवाद के आरोपों सहित मौलिक अधिकारों के शांतिपूर्ण इस्तेमाल के लिए दर्ज मुकदमों को वापस लेना चाहिए और राजनीतिक रूप से प्रेरित गिरफ्तारी और हिरासत पर रोक लगानी चाहिए.

मालदीव में चरमपंथी समूहों, जो अक्सर हिंसक उग्र-राष्ट्रवादी या इस्लामी विचारधारा का समर्थन करते हैं, ने मीडिया प्रतिष्ठानों और नागरिक समाज समूहों को उत्पीड़ित किया है और उन पर हमले किए हैं. उन्होंने उन लोगों को निशाना बनाया है जो सोशल मीडिया पर सरकार की आलोचना करते हैं, ऐसी सामग्री प्रकाशित करते हैं जो उनके मुताबिक इस्लाम विरोधी है, समलैंगिक, उभयलिंगी और ट्रांसजेंडर (एलजीबीटी) लोगों के अधिकारों की वकालत करते हैं या उनके विरोधी राजनीतिक हितों की हिमायत  करते हैं. पत्रकारों पर हिंसक हमलों में भी इजाफा हुआ है. 2012 में अपने छद्म नाम "हिलाथ" से ख्यात इस्माइल रशीद पर चाकू से जानलेवा हमला; अगस्त 2014 में मालदीव्स इंडिपेंडेंट के पत्रकार अहमद रिलवान की गुमशुदगी और अप्रैल 2017 में ब्लॉगर यमीन रशीद की हत्या ऐसी प्रमुख हिसक घटनाओं में शुमार की जा सकती हैं. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर खौफ़ पैदा करनेवाली इन धमकियों और हमलों की जांच करने में पुलिस सुस्त रही है।

ह्यूमन राइट्स वॉच ने संबंधित सरकारों से शांतिपूर्ण अभिव्यक्ति और सभा करने के अधिकारों की रक्षा के लिए मालदीव पर दवाब बनाने की अपील की है. अगर मालदीव सरकार प्रतिबंधों को कम करने में विफल रहती है, तो यूरोपीय संघ के प्रस्ताव के मुताबिक प्रमुख पक्षों को सत्तारूढ़ पार्टी के वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ योजनाबद्ध बन्दिशों का समर्थन करना चाहिए.

एडम्स ने कहा, “राष्ट्रपति यमीन को इस मुगालते में नहीं रहना चाहिए कि अंतर्राष्ट्रीय निंदा से बचे बगैर वह असहमति को कुचल सकते हैं और चुनाव में धांधली कर सकते हैं. मालदीव की मदद करने वाले पक्ष  चुनावों को गंभीरता से लें, इसके लिए जरूरी है कि उनकी सरकार फ़ौरी तौर पर आवश्यक कदम उठाए.”