प्रो. जोसेफ कानेटासी

निजता के अधिकार पर संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत

मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय

पालिस विल्सन

रूए डेस पैक्विस, 52

1201 जिनेवा

स्विट्जरलैंड

संदर्भ: संयुक्त राज्य अमेरिका की यात्रा

31 मई, 2017

प्रिय प्रो. कानेटासी,

हम निजता के अधिकार पर संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत के रूप में आपकी संयुक्त राज्य अमेरिका की आगामी यात्रा का स्वागत करते हैं. यह पत्र कुछ मुद्दों पर गहन रूप से केंद्रित है, हम मानते हैं कि अपनी यात्रा के दौरान आपके लिए इन मुद्दों की पड़ताल और इन्हें संबोधित करना महत्वपूर्ण होगा.

हमारा निष्कर्ष है कि निगरानी कानूनों, नीतियों और व्यवहारों के परिणामस्वरूप अमेरिका निजता और पत्राचार पर मनमाने या गैरकानूनी हस्तक्षेप से स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 17) सहित नागरिक और राजनीतिक अधिकारों पर अंतर्राष्ट्रीय समझौते (आईसीसीपीआर) के दायित्वों का निर्वाह नहीं कर रहा है. हम आशा करते हैं कि आपकी यात्रा संचार और निजी डेटा के प्रबंधनके मामले में निजता और अन्य मौलिक अधिकारों के प्रति देश के सम्मान को आगे बढ़ाने में मदद करेगी.

हालांकि नीचे दिए गए सारांश विशिष्ट कानूनी अधिकारों और अवधारणाओं के बारे में कुछ विस्तार में जाते हैं, हमारा विश्वास है कि अमेरिकी कार्यपालिका ने कुछ ऐसे व्यवहारों और सिद्धांतों को स्वीकार कर लिया है जो उचित स्वतंत्र अनुमोदन, निरीक्षण और जवाबदेही से बचने की अनुमति देने से उसे पूरी तरह रोकता है. नतीजतन, जहाँ कठोर कानून बनाने वाली एक व्यवस्था सामने है वहीँ यह गंभीर दुर्व्यवहारों और इस प्रकार जोखिमों को जन्म दे रही है. मूल रूप से, खुफिया जानकारी एकत्र करने के कई अमेरिकी तरीकों ने आईसीसीपीआर के तहत अमेरिका की संधि शर्तों का उल्लंघन किया है और इस तरह वैधता, आवश्यकता और आनुपातिकता की आवश्यकताओं को पूरा करने में विफल रहा है.

  1. कार्यकारी आदेश 12333

हमारी सबसे बड़ी चिंता है कार्यकारी आदेश 12333(ईओ 12333). इसे साल 1981 में कार्यकारी शाखा ने जारी किया था और तब से इसमें कई संशोधन हो चुके हैं (सबसे हाल में 2008 में संशोधन हुए).[1]आमतौर पर, इस आदेश से अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की गतिविधियों, संचार माध्यमों की निगरानी जैसे तरीकों से सूचना संग्रह पर नियंत्रण किया जाता है. ऐसा प्रतीत होता है कि आदेश के जरिए एजेंसियों को अमेरिकी सीमाओं के पार गैर अमेरिकी लोगों के संचार माध्यमों की निगरानी की खुली छूट दे दी गई है.[2]यह कुछ व्यापक स्थितियों में अमेरिकी लोगों की निगरानी का भी आधार बन सकता है.[3]

ईओ 12333 को अभी भी किसी संहिता में बांधा नहीं गया है और इसे अपनाने में विधायिका की कोई भूमिका नहीं थी. नवम्बर 2013 में, सीनेट सेलेक्ट कमिटी ऑन इंटेलिजेंस के अध्यक्ष ने बताया कि कांग्रेस की भी इस प्राधिकार के अंतर्गत निगरानी की देखरेख में या तो बहुत थोड़ी या फिर कोई भूमिका नहीं है. ह्यूमन राइट्स वॉच को इस मामले में किसी बदलाव की जानकारी नहीं है.[4]इसके अलावा, इस आदेश के तहत निगरानी, न्यायिक प्राधिकार या देखरेख के अधीन नहीं है और सरकार यह मानती है कि आपराधिक प्रतिवादी समेत किसी व्यक्ति को यह सूचित करने की जरुरत नहीं है कि इस प्राधिकार के तहत उसके संचार माध्यमों की निगरानी की गई है.[5]

ऐसी जानकारी मिली है कि अमेरिका ने समूची दुनिया में अपने विस्तृत निगरानी कार्यक्रम के लिए ईओ 12333 को आधार बनाया है, जिसमें अन्य चीजों के अलावा निम्नलिखित बातें शामिल हैं:

  • रोजाना लाखों टेक्स्ट मैसेज और करोड़ों मोबाइल फ़ोन के लोकेशन की अद्यतन जानकारियों का अंतर्ग्रहण (इन्टरसेप्शन).
  • बड़े पैमाने पर आकड़ों का अंतर्ग्रहण, साथ ही, गैर अमेरिकी प्रमुख इन्टरनेट कंपनियों के आंकड़ा केन्द्रों के बीच संचारित हो रहे कंटेंट (अंतर्वस्तु) का अंतर्ग्रहण.
  • पांच देशों के सभी फ़ोन(मोबाइल) कॉल्स के रेकॉर्ड्स की प्राप्ति, और इनमें दो देशों के बीच हुई वार्तालाप के विषय वस्तु की जानकारी प्राप्त करना.[6]

अमेरिकी सरकारी अधिकारियों की यह समझ है कि इलेक्ट्रोनिक सूचनाओं को जबतक मानव हाथों द्वारा कुछ तरीकों से परिशोधित न कर लिया जाए या उनकी जाँच न की जाए, सरकार के लिए उनका "संग्रहण" जरुरी नहीं.[7]यह समझ उन नियमनों में परिलक्षित होती है जो खास एजेंसियों द्वारा खुफिया जानकारी एकत्र करने की गतिविधियों को नियंत्रित करते हैं. उदाहरण के लिए, "इलेक्ट्रोनिक माध्यमों से प्राप्त आंकडें तभी "संग्रहित" किए जाते हैं जब इन्हें बोधगम्य रूप में परिशोधित कर लिया गया हो."[8]इस व्याख्या का अर्थ है कि अमेरिका अपनी नीतियों के तहत ऐसी सूचनाओं के मनमाने "संग्रह" के मौजूद सीमित सुरक्षा कवचों को खतरे में डाले बगैर डिजिटल सूचनाओं का विशाल भंडार बना सकता है. यह व्याख्या इस पर भी  असर डालती है कि अमेरिकी सरकार धारा 17 के अंतर्गत अपने दायित्वों को कैसे लेती है, क्योंकि अमेरिका यह मानता है कि अगर व्यक्तिगत आकड़ें इकट्ठे कर लिए गए हों और उनका डेटाबेस तैयार कर लिया गया हो,लेकिन मानव हाथों से इनका परिशोधन नहीं हुआ हो, तो उसने  निजता के अधिकार में हस्तक्षेप नहीं किया है.

ईओ 12333 का उल्लेख करते हुए 2014 में स्टेट डिपार्टमेंट के एक विसलब्लोअर ने चेतावनी दी कि "कुछ (अमेरिकी) खुफिया व्यवहार, यहाँ तक कि कांग्रेस के सदस्यों से भी, इतने गुप्त होते हैं कि हमारे लोकतंत्र में उनमें परिवर्तन करने का अवसर नहीं है."[9]विसलब्लोअर ने यह भी बताया कि हो सकता है कि खुफिया एजेंसियां बगैर उचित आधार के बड़े पैमाने पर अमेरिकी लोगों के टेलीफोन कॉल्स को रिकॉर्ड करने में इस आदेश का इस्तेमाल कर रही हों.

ईओ 12333 के तहत निगरानी करने के लिए कार्यकारी शाखा को अबाध शक्ति, अपने प्राधिकार के अंतर्गत किए गए कार्यों के लिए कांग्रेस या अन्य निरीक्षण निकायों के प्रति उत्तरदायित्व का अभाव, साथ ही इस प्राधिकार के कथित रूप से अनुकूल की गई इसकी गतिविधियाँ निजता के अधिकार को नज़रन्दाज करती हैं और इसके उल्लंघन की ज्यादा संभावना है.

हम आपसे आग्रह करते हैं कि कार्यपालिका और कांग्रेस के नेताओं से मिलते समय उनके समक्ष इन मुद्दों को उठाएं, उन्हें ईओ 12333 के दायरे को सीमित करने और साथ ही कांग्रेस और पब्लिक में इसकी रिपोर्टिंग करने के लिए प्रोत्साहित करें.

2. विदेशी खुफिया निगरानी अधिनियम की धारा 702

वर्ष 2008 में स्वीकृत विदेशी खुफिया निगरानी अधिनियम (एफआईएसए) की धारा 702 खुफिया एजेंसियों को विदेशों में गैर अमेरिकी लोगों के टेलीफोन और इन्टरनेट की बिना उचित आधार पर मानिटरिंग हेतु "टारगेट" करने का अधिकार देती है. जैसाकि 2014 में प्राइवेसी एंड सिविल लिबर्टीज ओवरसाइट बोर्ड की रिपोर्ट में पुष्टि की गई है, एजेंसियां इस प्रावधान के अनुरूप कम-से-कम दो व्यापक निगरानी कार्यक्रम संचालित करती हैं.[10]एक कार्यक्रम "अपस्ट्रीम" स्कैनिंग है, इसमें कथित तौर पर बाकी दुनिया से अमेरिका को जोड़ने वाली इन्टरनेट अधिसंरचना के संचार प्रवाह का बड़े पैमाने पर स्वचालित सर्च होता है.[11]दूसरा है "प्रिज्म", यह नेशनल सिक्यूरिटी एजेंसी(एनएसए) को फ़ेडरल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टीगेशन (एफबीआई) की मदद से बगैर किसी उचित आधार के अमेरिकी इन्टरनेट कंपनियों से ईमेल और त्वरित मैसेज जैसे निजी संचार की मांग करने में समर्थ बनता है. पूर्व एनएसए कांट्रेक्टर एडवर्ड स्नोडेन द्वारा प्रकाश में लाये गए दस्तावेज बताते हैं कि इनमें अन्य के साथ गूगल, एप्पल और फेसबुक जैसी दिग्गज इन्टरनेट कंपनियां शामिल हैं.[12]

धारा 702 के तहत सरकार जिस उद्देश्य से संचार माध्यमों की मानिटरिंग कर सकती है, वह काफी व्यापक है और यह काफी छूट देती है: कार्यकारी शाखा को सिर्फ यह प्रमाणित करना पड़ता है कि निगरानी का बड़ा मकसद है "विदेशी खुफिया सूचना" हासिल करना.[13]बाद वाली शब्दावली की ऐसी विस्तृत परिभाषा दी गई है ताकि इसके अंतर्गत, उदहारण के लिए, "अमेरिका के विदेशी मामलों से सम्बंधित ...विदेशी सत्ता या विदेशी भू-क्षेत्र के बारे में सूचना प्राप्त की जा सके."[14]

धारा 702 के तहत निगरानी में निश्चय ही अमेरिका के बाहर गैर अमेरिकी व्यक्ति, जैसे फ्रांस में फ्रांसीसी नागरिक को औपचारिक तौर पर "निशाना" बनाया जाना चाहिए.[15]जबकि फॉरेन इंटेलिजेंस सर्विलांस कोर्ट (एफआइएससी) को निशाना बनाने और अन्य प्रक्रियाओं, जिनमें अमेरिकी नागरिकों के लिए कुछ सुरक्षा प्रावधान निहित हैं, को वार्षिक स्वीकृति देनी चाहिए,[16]न तो एफआइएससी और न ही कोई अन्य स्वतंत्र निकाय व्यक्ति को निशाना बनाने के निर्णय को अधिकृत करते हैं या समीक्षा करते हैं और न ही गैर अमेरिकी नागरिकों के मानवाधिकारों के सम्मान को सुनिश्चित करने हेतु बाध्य हैं. (एफआइएससी खुद एक समस्याग्रस्त निकाय है क्योंकि इसके बहुत सारे क्रियाकलाप गोपनीय होते हैं.)[17]

इसके अलावा, हालाँकि कार्यकारी शाखा "लक्षित" सूचनाएं प्राप्त करने का दावा करती है, लेकिन धारा 702 सरकार को यह अधिकृत करती हुई प्रतीत होती है कि "अनावश्यक रूप से" बड़ी संख्या में संभावित संचार को कब्जे में लिया जाए.[18]. जब वाशिंगटन पोस्ट ने एजेंसियों द्वारा धारा 702 के तहत एकत्र 160,000 लीक हुई ई-मेल और त्वरित मैसेज का मूल्यांकन किया तो उसने पाया कि इनमें 90 फीसदी उन अकाउंट होल्डरों के हैं जिनके बीच के संचार इस निगरानी के "लक्ष्य" नहीं थे.[19]

हमारा विश्वास है कि धारा 702 अमेरिकी संविधान के साथ संगति नहीं बिठाती, लिहाजा निजता के अधिकार के "कानूनी" पक्ष का उल्लंघन करती है. इसके अलावा, जबकि कानून के मुताबिक विस्तृत नियम व निर्णयों के समूह औपचारिक तौर पर निगरानी को नियंत्रित करते हैं,[20] इस धारा में  व्यक्तिगत आधार पर मॉनिटरिंग की न्यायिक समीक्षा की जरूरत नहीं होती है, यह निजता के अधिकार में अनावश्यक तथा असंगत हस्तक्षेप की इजाजत देती है, भेदभावपूर्ण निर्णयों के खिलाफ पर्याप्त सुरक्षा को शामिल नहीं करती है, और प्रभावकारी सुधारों के लिए कोई सार्थक अवसर मुहैया नहीं करती है. हम अमेरिकी आप्रवासियों और सीमावर्ती समुदायों पर इन गतिविधियों के संभावित असंगत प्रभावों को लेकर भी चिंतित हैं.[21]

इस साल 2017 के अंत में धारा 702 ख़त्म हो जाएगी. अमेरिकी नीति निर्माताओं के बीच बहस हो रही है कि इस कानून को फिर से अधिकृत किया जाए कि नहीं और किया जाए तो किस रूप में. इसे एक मुकदमे में भी चुनौती मिलाने वाली है जिसमें ह्यूमन राइट्स वॉच एक वादी है.[22]हम आपको प्रोत्साहित करते हैं कि आप इस कानून संबंधी चिंताओं पर बहस के लिए और इसे अन्तराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों के अनुरूप बनाने की खातिर हाउस तथा सीनेट ज्युडीसियरी कमिटी, और साथ ही नागरिक समाज तथा औद्योगिक समूहों के सदस्यों से मुलाकात करें.

3.. खुफिया-साझा समझौता

ईओ 12333 नेशनल इंटेलिजेंस के निदेशक को "विदेशी सरकारों और अन्तराष्ट्रीय संगठनों के साथ खुफिया और खुफिया-रोधी व्यवस्थाओं व समझौतों में जाने की अनुमति देता है."[23]इन व्यवस्थाओं के लिए विधायिका की अनुमति की जरूरत नहीं है.

यद्यपि कार्यकारी शाखा ने अमेरिका और ब्रिटेन[24] से सम्बंधित कुछ ऐतिहासिक दस्तावेजों को जारी किया है, एडवर्ड स्नोडेन ने पत्रकारों को ऐसे सहमति स्मारपत्र मुहैया कराए हैं जो बताते हैं कि अमेरिका ने अशोधित खुफिया आंकडें इजराइल[25]को साझा किया है.हम किसी भी ऐसी खुफिया-साझा व्यवस्था से अनभिज्ञ हैं जिसके वर्त्तमान क्षेत्र और विवरणों को सरकार ने सार्वजानिक किया है.

2014 में एक वरिष्ठ अमेरिकी खुफिया अधिकारी ने ह्यूमन राइट्स वॉच के साथ साक्षात्कार में दावा किया कि उन परिस्थितियों में भी सरकार को विदेशी राज्यों से अमेरिकी नागरिकों के बारे में खुफिया जानकारी हासिल करने का हक़ है जिनमें अमेरिका द्वारा खुद निगरानी करना गैरकानूनी होगा, यद्यपि अधिकारी ऐसे खुफिया कार्यों के लिए आग्रह नहीं कर सकते हैं.[26]

अभी हाल में, माइक पॉमपेओ जो अब सीआईए के निदेशक हैं, के लिए सीनेट कमिटी ऑन इंटेलिजेंस की हुई पुष्टिकरण सुनवाई के दौरान सीनेटर रोंन वाइडेन ने कहा:

सीआइए से विशिष्ट आग्रह के बगैर भी, उसके विदेशी पार्टनर, कंपनी, संगठन या व्यक्ति अमेरिकी नागरिकों से सम्बंधित विस्तृत साइबर क्रियाकलापों या अन्य निगरानियों, साथ ही उन्हें लक्षित सूचना संग्रह या उनके संचार प्रेषणों के थोक सूचना संग्रह के परिणामों से सीआइए को अवगत करा सकते हैं. इन सूचनाओं में राष्ट्रपति ट्रम्प के हितों के बरखिलाफ हित रखने वाले अमेरिका के राजनीतिक शख्सियतों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं, गैर लाभकारी संगठनों के नेताओं, पत्रकारों, धार्मिक नेताओं और व्यवसायियों तथा साथ ही अनगिनत निर्दोष अमेरिकियों के संचार प्रेषण शामिल हो सकते हैं.[27]

जबकि वरिष्ठ खुफिया अधिकारियों और वाइडेन द्वारा उपलब्ध सूचनाएं अमेरिकी नागरिकों पर केन्द्रित हैं, सार्वजानिक तौर पर ज्ञात ऐसी कोई बाध्यता नहीं है जो गैर अमेरिकी नागरिकों के बारे में समान रूप से सही होने से इन टिप्पणियों को रोके.

जैसा कि व्यापक रूप से विदित है कि अमेरिका का अन्य एंग्लोफोन मित्र राष्ट्रों("द फाइव आईज" के रूप में ज्ञात) और साथ ही अनेक दूसरे राज्य साझेदारों के साथ ऐतिहासिक रूप से मजबूत खुफिया जानकारी साझा करने की मजबूत व्यवस्था रही है.[28]इस तरह की खुफिया साझेदारी आतंकवाद-निरोध और कानून क्रियान्वयन सहयोग का मुख्य आधार रहा है. हालाँकि, ये व्यवस्थाएं विधायिका के बजाय प्रायः हमेशा कार्यपालिका नीति की क्रियाएं होती हैं, और इनके विवरणों को सार्वजनिक नहीं किया जाता है.

ह्यूमन राइट्स वॉच इस बात को लेकर चिंतित है कि अन्य राज्यों के साथ अमेरिकी खुफिया-साझा व्यवस्था में लगभग पूरी अपारदर्शिता व्याप्त है, साथ ही स्वतंत्र निकायों द्वारा देखरेख का पूरी तरह अभाव है, ऐसी स्थिति में इन व्यवस्थाओं से अच्छे-खासे स्तर पर मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हो सकता है. हम आपसे आग्रह करते हैं कि प्रशासन और कांग्रेस के अधिकारियों पर यह जोर दें कि सूचना तथा इन व्यवस्थाओं की देखरेख के अभाव से (अमेरिकी और गैर अमेरिकी नागरिकों दोनों की) निजता के अधिकार को सुरक्षा कवच प्रदान करने वाली राजकीय निगरानी पर घरेलू नियंत्रण ख़त्म हो सकता है और कानूनी उसूलों का उल्लंघन हो सकता है.

4. समानान्तर निर्माण

2013 में रायटर्स ने खबर दी कि जहाँ ड्रग एन्फोर्समेंट एडमिनिस्ट्रेशन (डीईए) की एक गुप्त इकाई, स्पेशल ऑपरेशन डिवीज़न खुफिया निगरानी आंकड़ों के आधार पर अमेरिकी कानून प्रवर्तन एजेंटों के लिए टिप्स तैयार कर रहा था, वहीं उन एजेंटों को इस बात के लिए कि उन्होंने परिणाम देने वाले साक्ष्य कैसे प्राप्त किए, का अलग स्पष्टीकरण देने के निर्देश दे रहा था – इसप्रकार मूल टिप्स को छुपा रहा था.[29]यह व्यवहार, जो कि "समानान्तर निर्माण" कहा जाता है, आपराधिक प्रतिवादी को (और संभवतः जज को भी) उनके मामलों में जाँच में प्रयुक्त सूचना के सही स्रोतों को उजागर करने से, और इसप्रकार इन प्राधिकारों के अंतर्गत इनके संग्रह एवं प्रसार की वैधता को चुनौती देने से रोकता है.

फ्रीडम ऑफ़ इनफार्मेशन एक्ट के तहत आवेदन के जवाब में डीईए की उद्घाटित प्रशिक्षण सामग्री इस व्यवहार की पुष्टि करती है और इसके वैध व नीतिगत कारणों पर प्रकाश डालती है.[30]अन्य सरकारी दस्तावेज और साथ ही रायटर्सको दिए गए डीईए अधिकारियों के बयान बताते हैं कि यह तकनीक इतनी पुरानी है कि यह "सुदृढ़ अवधारणा" बन सकती है. अब अवर्गीकृत किये गए 1983 के दस्तावेज के अनुसार यह व्यवहार लम्बे अरसे से चला आ रहा है. इसने इस "समस्या" का हल निकला कि "खुफिया के लिए उपयुक्त सुरक्षा मानकों को बरक़रार रखते हुए कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा खुफिया सूचनाओं का अधिकतम प्रसार और उपयोग कैसे किया जाए." दस्तावेजके अनुसार इस "समस्या" का एक पहलू "संघीय आपराधिक प्रक्रिया" से सामने आया, "जो  प्रतिवादी को अभियोजन द्वारा प्रस्तुत किसी साक्ष्य के बारे में प्रासंगिक सूचना हेतु डिसकवरी मोशन (प्रकटीकरण प्रस्ताव)  के लिए सक्षम बनाती है."[31]समस्या के हल के तौर पर, दस्तावेज स्पष्ट रूप से सिफारिशों पर विचार करता है:

खुफिया एजेंसी ड्रग प्रवर्तन प्रक्रियाओं में मदद करती है जिससे कि ड्रग एजेंसियां स्वतंत्र रूप से खुफिया तंत्र विकसित कर लें और इसकी गुंजाइश कम कर दे कि किसी आपराधिक प्रतिवादी के मामले में खुफिया स्रोत व पद्धति अनिवार्य माना जाए, वास्तव में, यह स्रोत व पद्धति के मामले में, स्पष्ट ट्रायल में उदभेदन (फायरब्रेक) का काम करे.[32]

हम डरते हैं कि खुफिया आधारित साक्ष्य तक प्रतिवादियों की प्रत्याशित पहुँच को अधिकार के बजाए समस्या के तौर पर देखना अमेरिकी खुफिया तथा कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच व्यापक रूप से मौजूद रह सकता है. हम चिंतित हैं कि समानान्तर निर्माण जैसा व्यवहार, जो कि रायटर्स में उद्धृत उसी वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, "रोजमर्रे" के जीवन में खूब अमल में आता है, निष्पक्ष ट्रायल के अधिकार और जोखिम को नजरअंदाज करता है, लिहाजा समग्र तौर पर अमेरिकी आपराधिक प्रणाली की अखंडता को कमजोर करता है. इस मुद्दे पर कांग्रेस, न्यायालय और आम लोगों में जितनी समीक्षा हुई है उससे कहीं अधिक की जरूरत है. हम आपकी यात्रा के दौरान आपसे इसपर आगे चर्चा करने की उम्मीद रखते हैं, और आशा करते हैं कि आप एफबीआइ, डीईए तथा न्याय विभाग समेत कानून प्रवर्तन अधिकारियों से मिलते वक्त इस मुद्दे को जरूर उठाएंगे.

5.एन्क्रिप्शन[33]

 

उद्योग, सूचना सुरक्षा टेक्नोलॉजिस्ट और डिजिटल अधिकार संगठनों के सम्मिलित अभियानों ने अमेरिका में पिछले साल एन्क्रिप्शन को कमजोर करने के प्रयासों का सफलतापूर्वक विरोध किया. जब मीडिया संगठनों ने अप्रैल 2016 में कोर्ट आर्डर एक्ट का सीनेटर डिंने फेंसटेन और रिचर्ड बर्र की अनुपालन रिपोर्ट का "विमर्श प्रारूप" जारी किया तो साइबर सुरक्षा, निजता तथा अन्य अधिकारों पर विधेयक के नकारात्मक प्रभावों को देखते हुए प्रायोजकों ने औपचारिक तौर पर इसे पेश करने से इंकार कर दिया.[34]विधेयक के लिए यह आवश्यक होगा कि प्रौद्योगिकी कंपनियां कोर्ट के मांगने पर "बोधगम्य फ़ॉर्मेट"(यानी अनएनक्रिप्टेड) में एनक्रिप्टेड सूचनाएं सुलभ कराएं. विधेयक यह निर्दिष्ट नहीं करता कि कंपनियां कैसे एनक्रिप्टेड सूचनाओं को बोधगम्य बनाएंगी, लेकिन यह ढेर सारी कंपनियों को मज़बूर करेगा कि वे एन्क्रिप्शन और उत्पादों में सुरक्षा फीचरों से बचने के लिए "बैक डोर"(चोर दरवाजे) का रास्ता अपनाएं.

 

हालाँकि, ऐसा मालूम पड़ता है कि इस विधेयक को औपचारिक रूप से प्रस्तुत करने में देरी सिर्फ अस्थायी राहत रही है. अमेरिकी कानून प्रवर्तन अधिकारी प्रमुख टेक कंपनियों पर दबाव बनाए हुए हैं कि उन्होंने शुरू से अंत तक एनक्रिप्टेड चाट एप्लीकेशन और डिफ़ॉल्ट डिस्क एन्क्रिप्शन समेत सुरक्षा सम्बन्धी सुधारों का जो कार्यक्रम शुरू किया है, उन्हें वापस लें और वे विशेष पहुँच हेतु आदेश के लिए कानून की मांग कर रहे हैं.[35]हालाँकि राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कानून के लिए पहल करने से इंकार कर दिया लेकिन वह एन्क्रिप्शन बैक डोर के खिलाफ मजबूत पक्ष रखने या इस मामले में कड़ा रूख अपनाने में विफल साबित हुए.[36]एफबीआइ निदेशक जेम्स कोमी ने अपनी बर्खास्तगी से पहले या कांग्रेस में गवाही से पूर्व कई मौकों पर व्यापक तौर पर प्रचलित एन्क्रिप्शन के "हल" की जरूरत को सामने लाया था.[37]बताया जाता है कि सीनेटर फेंसटीन और बर्र ने भी सितम्बर में एन्क्रिप्शन–विरोधी अपने संशोधित प्रारूप को बंटवाया था, यद्यपि उसके ठीक-ठीक विवरण सार्वजानिक नहीं किए गए हैं.[38]

संक्षेप में, हमें यकीन है कि संभवतः सरकार के विभिन्न हिस्से- संघीय और राज्य सरकारें यह मांग करना जारी रखेंगी कि कंपनियां एन्क्रिप्शन को कमजोर करें और कानून प्रवर्तन एजेंसियों की एनक्रिप्टेड संचार तक विशेष पहुँच की इजाजत दें. कंपनियों को शुरू से अंत तक एन्क्रिप्शन को हटाने के लिए मजबूर करने से तमाम इन्टरनेट व मोबाइल फ़ोन उपभोक्ताओं की सुरक्षा ढीली पड़ जाएगी, जबकि नियत दुर्भावनापूर्ण हाथों से एन्क्रिप्शन को बचाए रखने के मामले में यह कारगर नहीं होगा.

डिजिटल युग में, गुमनाम रहकर और निजी तौर पर संचार के अधिकार का आनंद उठाने के लिए मजबूत एन्क्रिप्शन जरूरी है. इंटरनेट नेटवर्क पर होने वाले ऑनलाइन संचार की अन्तर्निहित कमजोरी है कि वे राज्य और गैर राज्य किरदारों द्वारा अप्रत्यक्ष तथा अनचाही मॉनिटरिंग के प्रति असुरक्षित होते हैं. हमारे डिजिटल आंकडें ज्यादातर दूरदराज के क्लाउड सेवा प्रदाताओं के यहाँ भंडारित होते हैं, जिनपर हम भरोसा करते हैं कि बगैर स्वीकृति के सुरक्षित आंकड़ों के साथ छेड़छाड़ नहीं होगा.

इक्कीसवीं सदी में ऑनलाइन निजता मजबूत एन्क्रिप्शन पर टिकी होती है. दुर्भाग्य से, कमजोर और आंशिक एन्क्रिप्शन न केवल कमजोर और आंशिक सुरक्षा मुहैया कराते हैं बल्कि पूरी तरह सुसज्जित खुफिया एजेंसियों और माहिर हैकरों से बिलकुल असुरक्षित होते हैं. लिहाजा, आइसीसीपीआर के लिए जरूरी है कि आकंड़ों के डीएन्क्रिप्शन हेतु आवश्यक राज्य आदेश समेत मजबूत एन्क्रिप्शन पर किसी भी सीमा के लिए कानूनी प्रावधान हों, यह समानुपातिक हों और वैधानिक लक्ष्यों के वास्ते अनिवार्य हों. इस मुद्दे पर अमेरिकी सरकार के साथ अपनी वकालत में, हमने तर्क दिया है कि तमाम ऑनलाइन संचार के सुनिश्चित डीएन्क्रिप्शन, और साथ ही करोड़ों ऑनलाइन संचार जिससे सार्वजनिक व्यवस्था या राष्ट्रीय सुरक्षा को कोई खतरा का अंदेशा नहीं है, की आवश्यकता समानुपातिक नहीं हो सकती तथा इसे कभी आवश्यक नहीं दर्शाया गया है. कानून, और साथ ही मानवाधिकार की दृष्टि में, ऑनलाइन बात-चीत करने वाला समाज का हर व्यक्ति संदेहास्पद नहीं है.

हम आपसे आग्रह करते हैं कि अपनी अमेरिकी यात्रा के दौरान संघीय और राज्य कानून प्रवर्तन अधिकारियों तथा कांग्रेस के नीति निर्माताओं के साथ मुलाकात में निजता व अन्य मानवाधिकारों की सुरक्षा हेतु मजबूत एन्क्रिप्शन के महत्व का सवाल जरूर उठाएं.

निस्संदेह, निजता के दूसरे पहलुओं, साथ ही साथ निजता व डिजिटल प्रौद्योगिकी से जुड़े बहुतेरे मुद्दे हैं जो ह्यूमन राइट्स वाच की चिंताएं हैं और जिनके प्रति आपका ध्यान अपेक्षित है. अन्य एनजीओ के साथ आपकी बैठक आयोजित करने और या तो पहले या फिर यात्रा के दौरान आपसे सीधे मिलने सहित जितना संभव हो आपकी यात्रा में मदद कर हमें ख़ुशी होगी. आपकी यात्रा के लिए प्रासंगिक हमारी रिपोर्ट तथा कार्य विवरण परिशिष्ट में संलग्न हैं.

विश्वासभाजन,  

डीनाह पोकेम्प्नेर
जनरल काउंसल

सिंथिया एम. वोंग
वरिष्ठ इन्टरनेट रिसर्चर

सराह सेंट विन्सेंट
अमेरिकी निगरानी,राष्ट्रीय सुरक्षा और घरेलू कानून

 

 [1]कार्यकारी आदेश 12333: संयुक्त राज्य अमेरिका की खुफिया गतिविधियां (संशोधित रूप में), जो इस लिंक पर उपलब्ध हैंhttps://fas.org/irp/offdocs/eo/eo-12333-2008.pdf.

[2]देखें 50 यूएससी एस 1801 (i), "संयुक्त राज्य अमेरिका के लोग " में अमेरिकी नागरिक, वैध स्थायी निवासी और कुछ संगठनऔर निगम शामिल हैं; कार्यकारी आदेश (ईओ) 12333, सुप्रा एन. 1, §2.3.जहाँ एक ओर ईओ 12333 के निगरानीसंबंधित प्रावधानों को इस रूप में देखा जा सकता है कि आदेश का इरादा अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को "विदेशी खुफिया और खुफिया विरोधी उद्देश्यों के लिए" जानकारी प्राप्त करने हेतु निगरानी का उपयोग करने के लिए सक्षम बनाना है, वहीँ प्रेसिडेंशिअल पॉलिसी  डायरेक्टिव 28 (राष्ट्रपति का नीति निर्देश28) इस तरह की बाध्यता को लागू करने वाला प्रतीत होता है, हम ऐसे किसी भी उपाय के बारे में नहीं जानते हैं जो ऐसी किसी मांग को लागू करता है."विदेशी व्यक्तियों की क्षमता, इरादे या गतिविधियों..... से संबंधित जानकारी" के साथ-साथ यह आदेश "विदेशी ख़ुफ़िया" शब्द को भी परिभाषित करता है(§ 3.5 (ई)). ऐसे गैर-अमेरिकी व्यक्तियों द्वारा सार्थक पत्राचार की कल्पना करना मुश्किल है जो इस परिभाषा को पूरा नहीं करते..

 [3]कार्यकारी आदेश12333, सुप्रा एन. 1, §2.3.

[4]अली वाटकिंस, "एनएसए के अधिकांश आंकड़संग्रह का अधिकार रोनाल्ड रीगन के आदेश से मिला," मैकक्लाच्ची, 21 नवंबर, 2013,http://www.mcclatchydc.com/news/nation-world/national/national-security/article24759289.html.

[5]चार्ली सावेज, "विदा होते सहयोगी ने कहा, रीगन शासन काल के निगरानी सम्बन्धी आदेश अधिकारों का उल्लंघन करते हैं" एन.वाई. टाइम्स, 13 अगस्त, 2014,https://mobile.nytimes.com/2014/08/14/us/politics/reagan-era-order-on-surveillance-violates-rights-says-departing-aide.html.

[6]अमेरिकन सिविल लिबर्टीज यूनियन एंड सेंटर फॉर डेमोक्रेसी एंड टेक्नोलॉजी, "गुप्त निगरानी: बड़े पैमाने के पांच वैश्विक कार्यक्रम" मई 2015,https://cdt.org/files/2014/09/cdt-aclu-upr-9152014.pdf.

[7]देखेंकर्ट ओप्सहल और ट्रेवर टिम, "एनएसए के शब्द जाल की व्याख्या: सरकार ने निगरानी अधिकारों पर बहस में कांग्रेस को कैसे धोखा दिया," ईएफएफ डीपलिंक्स, 11 जून,2013, https://www.eff.org/deeplinks/2013/06/director-national-intelligences-word-games-explained-how-government-deceived.

[8]यूएसएसआईडी 18, 20 अक्टूबर, 1980, http://cryptome.org/nsa-ussid18-80.htm (12 फ़रवरी 2014 को देखा गया), धारा 3.4.

[9]जॉन नेपियर टाई, "जानिए एक्ज़ीक्यूटिव ऑर्डर 12333: रीगन शासन काल का नियम जो अमेरिकियों पर एनएसए की जासूसी करने की अनुमति देता है," वाशिंगटन पोस्ट, 18 जुलाई 2014, इसलिंकपरउपलब्धhttps://www.washingtonpost.com/opinions/meet-executive-order-12333-the-reagan-rule-that-lets-the-nsa-spy-on-americans/2014/07/18/93d2ac22-0b93-11e4-b8e5-d0de80767fc2_story.html.

[10]प्राइवेसी एंड सिविल लिबर्टीज ओवरसाइट बोर्ड, विदेशी खुफिया निगरानी अधिनियम (2014) की धारा 702 के अनुरूप संचालित निगरानी कार्यक्रम पर रिपोर्ट,  इस लिंक पर उपलब्धhttps://www.pclob.gov/library/702-Report.pdf.

[11]एशले गर्स्की एंड पैट्रिक तोमेयी, "अभूतपूर्व और अवैध: एनएसए की 'अपस्ट्रीम' निगरानी"एसीएलयू, 23 सितंबर, 2016,https://www.aclu.org/blog/speak-freely/unprecedented-and-unlawful-nsas-upstream-surveillance.

[12]देखें "प्रिज्म डेटा-संग्रह कार्यक्रम की व्याख्या करते हैंएनएसए स्लाइड्स," वाशिंगटन पोस्ट, 10 जुलाई, 2013,http://www.washingtonpost.com/wp-srv/special/politics/prism-collection-documents/.

[13]50 यूएससी § 1881ए(जी)(2)(ए)(वी).

[14]50 यूएससी § 1801 (ई).

[15]50 यूएससी § 1881 ए(ए)-(बी).

[16]50 यूएससी § 1881 ए(डी)-(ई), 50 यूएससी § 1801 (एच).

[17]एफआईएसए कोर्ट के बारे में अधिक जानकारी के लिए आम तौर पर देखें, एलिज़ाबेथ गोएटीन और फ़ैज़ा पटेल, एफआईएसए कोर्ट के साथ क्या गलत हो रहा है? (2015), इसलिंकपर उपलब्धhttps://www.brennancenter.org/sites/default/files/publications/What_Went_%20Wrong_With_The_FISA_Court.pdf.

[18]देखें, उदाहरण के लिए,अमीकस क्यूरी का संक्षिप्त विवरण, संयुक्त राज्य अमेरिका का विदेशी खुफिया निगरानी न्यायालय, 16 अक्टूबर, 2015, पी. 11,इसलिंकपर उपलब्ध हैhttps://www.aclu.org/foia-document/brief-fisc-amicus-curiae-amy-jeffress?redirect=foia-document/brief-amicus-curiae ("व्यापक है आकस्मिक संग्रह का दायरा"); रोबिन ग्रीन, "सिर्फ ट्रम्प ही नहीं, हम सभी 'आकस्मिक संग्रह' के शिकार हैं", न्यूजवीक, मार्च 28, 2017, , http://www.newsweek.com/its-not-just-trump-we-are-all-victims-incidental-collection-574776.

[19]बार्टन गेलमैन और अन्य, "एनएसए-इंटरसेप्टेड डेटा में,  जिन लोगों को लक्ष्य नहीं बनाया गया उनकी संख्या लक्ष्य किए गए विदेशियों से ज्यादा है"वाशिंगटन पोस्ट, 5 जुलाई 2014,इसलिंकपरउपलब्धhttps://www.washingtonpost.com/world/national-security/in-nsa-intercepted-data-those-not-targeted-far-outnumber-the-foreigners-who-are/2014/07/05/8139adf8-045a-11e4-8572-4b1b969b6322_story.html?tid=a_inl&utm_term=.6fc55f584d8c.

[20]राष्ट्रीय ख़ुफ़िया निदेशक कार्यालय, "2016 की धारा 702 का प्रमाणीकरणऔर अन्य संबंधित दस्तावेजों को मंजूरी देने वाले एफआईएससी नियम काप्रकाशन" 11 मई, 2017,https://icontherecord.tumblr.com/post/160561655023/release-of-the-fisc-opinion-approving-the-2016.

[21]सारा सेंटविन्सेन्ट, "अमेरिकी खुफिया निगरानी से आप्रवासियों पर कैसे पड़ सकता है असर," 21 फ़रवरी 2017,https://www.hrw.org/news/2017/02/21/how-us-intelligence-surveillance-may-affect-immigrants.

[22]विकिमीडिया और अन्य बनाम राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी, मामला संख्या 1:15-सीवी-00662 (संयुक्त राज्य अमेरिका का मैरीलैंड जिला न्यायालय), 10 मार्च 2015 को दायर शिकायत,https://www.aclu.org/legal-document/wikimedia-v-nsa-complaint.

[23]ईओ 12333, एस 1.4 (ख)(4)(ए).

[25]राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी/केंद्रीय सुरक्षा सेवा (एनएसए/सीएसएस) और इज़राइली सिगिनट नेशनल यूनिट (आईएसएनयू) के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू),अमेरिकी व्यक्तियों के संरक्षण से संबंधित (तिथि अज्ञात), इस लिंक पर उपलब्ध  http://www.statewatch.org/news/2013/sep/nsa-israel-spy-share.pdf.

[26]ह्यूमन राइट्स वॉच, विथ लिबर्टी टू मॉनिटर ऑल (2014), इस लिंक पर उपलब्ध हैhttps://www.hrw.org/report/2014/07/28/liberty-monitor-all/how-large-scale-us-surveillance-harming-journalism-law-and.

[27]सीनेट कमिटी ऑन इंटेलिजेंस, "क्वेशचंस फॉर द रिकॉर्ड: माइक पॉमपेओ" (सम्पूर्ण), 18 जनवरी, 2017, पृष्ठ 5,https://www.intelligence.senate.gov/sites/default/files/documents/qfr-011217.pdf.

[28]देखें, उदहारण के लिए, प्राइवेसी इंटरनेशनल, "आइड्स वाइड ओपन,"https://www.privacyinternational.org/sites/default/files/Eyes%20Wide%20Open%20v1.pdfप्राइवेसी इंटरनेशनल, द फाइव आईज https://www.privacyinternational.org/node/51.

[29]जॉन शिफमैन और क्रिस्टिना कुक, "एक्सक्लूसिव: अमेरिकियों की जांच के लिए इस्तेमाल करने वाले कार्यक्रम को छिपाने के लिए एजेंटों को निर्देशित करता हैअमेरिका," रायटर्स, 5 अगस्त, 2013,http://www.reuters.com/article/us-dea-sod-idUSBRE97409R20130805.

[31]संदर्भित विषय: ड्रग एन्फोर्समेंट एजेंसीज द्वारा वर्गीकृत खुफिया सूचना के इस्तेमाल परसीआईपीसी नारकोटिक्स वर्किंग ग्रुप्स पैनल, 19 सितंबर, 1983,इस लिंक पर उपलब्ध हैhttps://www.hrw.org/sites/default/files/supporting_resources/cipc_narcotics_working_group.pdf.

[32]वही

[33]एचआरडब्ल्यू के एन्क्रिप्शन और मानव अधिकारों के पूर्ण विश्लेषण के लिए, देखें ह्यूमन राइट्स वाच, डिजिटल संचार में एन्क्रिप्शन और नाम गुप्त रखने के उपयोग पर अभिमत और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार के संरक्षण और संवर्धन पर संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत

को प्रस्तुत टिप्पणियां, 18 फरवरी, 2015,https://www.hrw.org/news/2015/02/18/comments-submitted-un-special-rapporteur-protection-and-promotion-right-freedom.

[34]सिंथिया वाँग, "डिस्पैचेज: सुरक्षा के लिए खतरा है प्रतिगामी यूएस एन्क्रिप्शन विधेयक", 8 अप्रैल 2016,https://www.hrw.org/news/2016/04/08/dispatches-regressive-us-encryption-bill-harms-security

[35]देखें जोसफमार्क्स, "न्यूयॉर्क डीए टू ट्रम्प: हेव आवर बैक्स अगेंस्ट कॉप-प्रूफ एन्क्रिप्शन,"नेक्स्टगोव, 17 फरवरी, 2017,http://www.nextgov.com/cybersecurity/2017/02/new-york-prosecutor-trump-have-our-backs-against-cop-proof-encryption/135526/.

[36]राष्ट्रपति बराक ओबामा को संयुक्त पत्र,सन्दर्भ: एन्क्रिप्शन, 27 अक्टूबर, 2016,https://www.hrw.org/news/2016/10/27/joint-letter-president-obama-re-encryption.

[37]टेलर आर्मरडिंग, "कोमी:मजबूतएन्क्रिप्शन से गोपनीयता-सुरक्षा सौदा को लगा धक्का" सीएसओ ऑनलाइन, मार्च 8, 2017, http://www.csoonline.com/article/3178299/security/comey-strong-encryptio...माइकल कान, एफबीआई निदेशक ने एन्क्रिप्टेड डाटा तक पहुँच पर अंतरराष्ट्रीय रूपरेखा जारी की,"कंप्यूटर वर्ल्ड, 23 मार्च 2017, http://www.computerworld.com/article/3184478/security/fbi-director-float...लोरेन्ज़ो फ्रांसिस्की - बिचिरिएई, "एफबीआई निदेशक सोचते हैं कि ट्रम्प शासन में एन्क्रिप्शन के खिलाफ संभव कानून संभव है," मदरबोर्ड, 3 मई, 2017,https://motherboard.vice.com/en_us/article/fbi-director-comey-law-agains....

[38]जूलियन सांचेज़, "फेनस्टीन-बोर 2.0: द क्रिप्टो बैकडोर बिल लिव्स ऑन," जस्ट सिक्यूरिटी, 9 सितंबर 2016,https://www.justsecurity.org/32818/feinstein-burr-2-0-crypto-backdoor-bill-lives